गुरुवार, 15 मई 2014

S. Manmohan Singh Ji.. A great human being, A poor politician

         


        पिछले कुछ समय से बहुत उल्टा-सीधा सुन रहा हु इस महान इंसान के बारे में तो सोचा क्यों न कुछ अपने मन की भी लिखूं ... मेरी आदत सी बन चुकी है की जो मैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में देखता हूँ उसके उल्ट ही सोचता हूँ.. अपनी खुद की ही राय बनाता हूँ, जो गलत भी हो सकती है लेकिन मुझे हमेशा सही ही लगती है..

         मेरी नज़र में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री चाहे कोई भी हो बहुत ही सम्मानीय होते हैं और उनके लिए कुछ भी गलत लिखना या उनपे चुटकले बना के उनकी खिली उड़ाना ऐसा ही है जैसा की हम खुद के घर के बजुर्ग का मज़ाक बना रहें हों..लोग जो चाहे कहते रहें लेकिन मुझे नहीं लगता की सरदार मनमोहन सिंह जी बहुत असफल प्रधानमन्त्री साबित हुए हैं...

          वैश्विक मंदी के दौर में जहाँ USA UK France और रूस जैसे समृद देशों की बहुत सी बिमा कंपनियां और बैंक कंगाल हो कर बंद हो गए वहीँ अपने देश में ऐसा कुछ नहीं हुआ...एक भी बड़ा कॉर्पोरेट बंद नहीं हुआ.. महंगाई जरुर बड़ी लेकिन वैश्विक मंदी में यह स्वाभाविक था.. सड़क परिवहन में बहुत सुधार हुआ है,,, बहुत से एक्सप्रेस वे बने हैं, नई सड़के बनी हैं .. बहुत से नए और आधुनिक रेलवे ट्रैक बने हैं.. बहुत ही जरुरी और सफल 108 एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई जिसका लाभ सभी ले रहे हैं.. और जिसका राजनीतिक लाभ मोदी जी गुजरात में और बादल साहिब पंजाब में उठा रहें हैं अपनी अपनी फोटो उसपे चिपका के.. पिछले दस साल में बैंकिंग, कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रिक मीडिया में बहुत आधुनिकता देखि जा सकती है..आतंकवादी घट्नाओं में बेहद कमी आई है.. मतलब बहुत सी उपलब्धियां रहीं हैं इस सरकार की..

         लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता की इस कांग्रेस कार्यकाल में बहुत से घोटाले भी सामने आयें हैं.. राष्ट्रमंडल घोटाला, कोयला घोटाला, स्पेक्ट्रम घोटाला, आदर्श घोटाला, इत्यादि इत्यादि... लेकिन एक बात गौर करने लायक भी है की अगर घोटाले हुयें हैं तो उनके पीछे जिनका हाथ था उन्हें तिहाड़ जेल की हवा भी खानी पड़ी है...घोटाले तो हर सरकार में हुयें हैं, लेकिन पकडे कितने गएँ हैं वो हम सभी जानते हैं.... यह भी एक सच हैं की कुछ घोटालो को बिकाऊ मीडिया ने बड़ा चड़ा के दिखाया है.. जिस नुकसान की बात मीडिया स्पेक्ट्रम घोटाले में कर रही है अगर उस रेट पे स्पेक्ट्रम बिक गया होता तो कॉल रेट आज 40-50 पैसे नहीं 2-3 रुपये होती और भूल जाओ की हमारी कामवाली बाई या रिक्शा वाले के पास मोबाइल होता.. ऐसे ही कोयले का आबंटन अगर मीडिया रेट से हो गया तो ईंटो के भाव दोगुने से भी ज्यादा हो जायेंगे... सचाई से हम सभी अंजान हैं...

           हमारे बेहद शांत स. मनमोहन सिंह जी अपनी उपलब्धियां गिना नहीं पाए और गलत लग रहे इल्जामों पे बहस भी नहीं कर पाए और हो गए बदनाम.. अगर कांग्रेस की तरफ से कोई बोला तो वो लोग जिन्हें कब क्या बोलना है इसका पता ही नहीं है.. पवन  सिब्बल, दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने अपनी  बेतुकी बयानबाजी से और राहुल गांधी के असमय चुप रहने से कांग्रेस के लिए लोगो के दिलों में जगह बनाये रखना और भी मुश्किल हो गया लेकिन बदनाम हुए हमारे सम्मानीय प्रधनमंत्री जी...

अब जब उनका कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है तो मुझे लगता है उन्हें उनकी बेहद सादगी, शालीन इंसानियत, साफ़ सुथरा और भ्रष्ट रहित राजनीतिक जीवन के लिए याद करना चाहिए.. उन्होंने उच्च अर्थशास्त्री होने का जो नाम पुरे विश्व में कमाया हैं और हमारे देश का नाम ऊँचा किया है, उसके लिए वो हम सभी से सम्मान के हकदार हैं.. चाहे कोई मोदी समर्थक हो यां केजरीवाल समर्थक, सभी को एक अच्छे इंसान होने का परिचय देकर इस महान नेता को एक यादगार विदाई देनी चाहिए.. वो चुटकलों या गालियों के हकदार नहीं हैं... ऐसा करने वालों की विरोधता करनी चाहिए.. उनका अपने प्रधानमंत्री ऑफिस के साधारण अधिकारियों को, दुसरे देशो के नेतायों को शुक्रिया करना और बिना किसी की विरोधता करते हुए अपने कार्यकाल को अंतिम रूप देना भी उनके अच्छे इंसान होने का सबूत देता है.. 

            आप इस सब को कैसे देखते हो कह नहीं सकता, लेकिन मैं इस बेहद शानदार शख्स का दिल से सम्मान करता हूँ और चाहता हूँ की उनका आगे का जीवन बहुत ही खुशनुमा हो..जय हिन्द !!!  :) :) :)






सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

लेकिन मुझे क्या !!!



        क्या हो गया है हमारे देश की जनता को और नेतायों को... एक समुदाय के लोग श्रीमान नरेंद्र मोदी जी से मांग कर रहें हैं की वो 2002 के गुजरात में हुए मुस्लिम विरोधी दंगो के लिए माफ़ी मांगे और दूसरी तरफ़ दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगो के लिए श्रीमान राहुल गांधी जी से माफ़ी की मांग जोर पकड़ रही है... इसमें कोई दो राय नहीं की यह दंगे देश पे ही नहीं इंसानियत पे भी कलंक है और दंगाइयों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए..

लेकिन मुझे हैरानी इस बात की हो रही है की यह मांग करने वाले अधिकतर वो लोग हैं जिन्हें सिर्फ अपने समुदाय पे हुए ज़ुल्म दिखते हैं... कोई बताएगा की उनसे कौन माफ़ी मांगेगा जिनके भाई बेटे यां बाप को सिर्फ हिन्दू होने की खातिर पंजाब में बसों, रेलगाड़ियों से निकाल के यां राह चलते गोली से उड़ा दिया गया... कोड़ियों  के भाव अपनी ज़मीन जायदाद बेचने के लिए मजबूर किया गया जिसके चलते बड़ी संख्या में हिन्दू पंजाब छोड़ दुसरे राज्यों में चले गए.. दुःख की बात यह है की आतंक फ़ैलाने वालों के लिए सजा माफ़ी की मांग की जा रही है और जिनके साथ अन्याय हुआ उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं..

उन हिंदुयों का क्या जो जम्मू कश्मीर से हिंसा और आतंक की वजह से पलायन कर गएँ हैं ... क्या गुजरात दंगो के लिए माफ़ी मांगने वालों को कश्मीरी आतंकियों और उन्हें साथ देने वालों से भी माफ़ी नहीं मंगवानी चाहिए ?.. दंगे कहीं भी हों, हिंसा किसी भी कारण हो, आतंकवाद किसी भी समुदाय के हक में हो वो गलत था गलत है और हमेशा गलत ही रहेगा... नेता लोग इस आग से हाथ सेंकते हैं तो सेंकते रहें लेकिन हम "आम" लोग कब तक इनकी बातों में आते रहेंगे..

अगर माफ़ी माँगना ही मुददा है तो माफ़ी तो हिंदुयों से भी मांगी जानी चाहिए... झेला तो इन्होने भी बहुत कुछ है.. अगर दिल्ली-गुजरात के दंगे एक हफ्ते चले थे तो पंजाब में तो आतंक पूरा एक दशक चला है.. जम्मू कश्मीर में तो दशकों से चल रहा आतंक अभी भी जारी है..क्योंकि हिन्दू अल्पसंख्यक नहीं है तो क्या उनके परिवार वालों को किसी अपने के जाने का दर्द नहीं होता.. क्या यह हिंदुयों के साथ अन्याय नहीं है ?... मैं मानता हूँ की दिल्ली दंगे यां गुजरात दंगे बेहद गलत थे और उनकी जितनी निंदा की जाये कम है... लेकिन साथ ही पंजाब में जो हिंदुयों के खिलाफ हिंसा हुई थी उसकी भी जोरदार निंदा होनी चाहिए.. हिंसा करने वालों को शहीद का नाम देकर "भगत सिंह" जैसे सच्चे शहीदों का अपमान नहीं किया जाना चाहिय...

वैसे मैं क्यों दुखी हो रहां हूँ ..!! मैं तो खुद अलप्संख्यक की श्रेंणी में आ पहुंचा हूँ.. अब तो मुझे भी विशेषाधिकार मिलेंगे जो मुझे कभी चाहिए ही नहीं थे क्योंकि मैं तो पहले से ही एक भारतीय होने का पूरा आनंद ले रहा था... खुद को भारतीय हिन्दू जैन समझ रहा था.. और अब हिन्दू से अलग करके "जैन" बना दिया गया है.. तो हिंदुयों के साथ अन्याय होता है तो हो...मुझे क्या !!! ... काश मैं भी यह सोच के खुश रह पाता !!!! 

रविवार, 7 जुलाई 2013

रास्ता भटक गई कलम..




             सुना था की कलम की धार तलवार से भी तेज़ होती है.. यह किसी की भी ज़िन्दगी में बदलाव ला सकती है.. देश के हक में उठे तो सैनिक का कार्य करती है और भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखे तो पुलिस तन्त्र की तरह जनता की सेवा करती है..

लेकिन जो हालात अपने देश की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पैदा कर रही है उसे देखकर तो लगने लगा है की यह एक समानांतर "आतंक" फैलाने का कार्य ज्यादा कर रही है... उत्तराखंड त्रासदी के पहले दो दिन तो मिडिया में वहां की खबरे ऐसे दिखाई जा रही थी जैसे दूरदर्शन में मूवी के दौरान Advertisement दिखाते थे... उन दिनों "मोदी की दिल्ली यात्रा" नितीश का BJP को छोड़ना इत्यादि इन्हें ज्यादा महत्वपूर्ण लगता था... अचानक इन्हें लगा की त्रासदी तो बड़ी है और TRP बढानें में सहायता कर सकती है तो सारे कैमरे उत्तराखंड की और घूम गए..

तब हमें भी लगा की मीडिया की मदद से जनता को कुछ फायदा जरुर होगा... चाहिए तो यह था की वो लोग जहाँ जा रहे हैं वहां के लोगो की पहचान सूचि को टेलीकास्ट करते... उल्टा उन्हें यह बताना ज्यादा जरुरु लगा की " हमारी टीम सबसे पहले" केदारनाथ पहुंची है... यह बताने में समय बर्बाद करते देखा गया की वो लोग वहां पहुंचे कैसे... वही मीडिया केंद्र और राज्य सरकार पे ऊँगली उठाती दिखी इस बात के लिए की सरकार के पास पन्द्रह मिनट का समय था लोगो को बचाने का लेकिन satellite फ़ोन नहीं होने की वजह से सरकार विफ़ल हुई.. कोई पूछे इन्हें की पन्द्रह मिनट में कोई क्या कर सकता था..

Tv पे सिर्फ वही लोग दिखाए गए जिन्हें सरकार से शिकायत थी की उन्हें वहां खाने पीने रहने की तकलीफ हुई.... हम सभी उनको हुए कष्ट को समझ सकते हैं लेकिन यह भी तो सोचने की बात है की कोई सरकार एक लाख लोगो को जल्दी से निकालने की व्यवस्था करती यां वहां हो रही लूट को रोकने की..??  जालंधर के एक  होटल व्यवसाई अपने परिवार समेत उसी त्रासदी में फंस गए थे.. एक रात किसी ने अपनी झोंपड़ी में रहने के लिए उनसे पांच हजार लिए... उन्होंने ख़ुशी से दिए क्योंकि एक तो उन्हें सहारा मिला और फिर उन्होंने उस घर में रहने वालों के लिए सोचा की वो लोग इस त्रासदी के बाद कैसे रहेंगे बिना रोज़गार और पैसे के...

यही बड़ी सोच मीडिया को रखनी चाहिय थी की पहले यात्रियों को बचाने में सहायता करते फिर वहां रहने वालों को फिर से कैसे बसाया जाये उसपे सरकारी कोशिशो के बारे में जनता को बताते... लेकिन यहाँ तो सिवाए आतंक फ़ैलाने के और कोई काम नहीं हो रहा... बार बार बताया जा रहा था की सरकार निकम्मी है बस सैनिक भगवान् का रूप लेकर बचाव कर रहे हैं... उनका कहने का तत्प्राए यही था की सैनिक खुद ही बैरकों से निकल के आ गए लोगो को बचाने.... उन्हें कोई समझाए सैनिक भी तो सरकार के कहने पे ही आयेंगे... और सैनिको ने वही किया जो उनका काम था... पूरा सरकारी तन्त्र वहां जुटा हुआ था लोगो के बचाव में...

कोई मुझे गलत समझे तो में बताना चाहूँगा की मुझे बहुत दिनों तक यह नहीं पता था की बहुगुणा सरकार कांग्रेस की है.. मुझे जानने वाले जानते हैं की मेरी  राजनीति में कोई रुची नहीं.... बस जो गलत है वो गलत और जो सही है वो सही...

और अपने मीडिया वाले बधाई के पात्र हैं की उनकी चालों में अपने नालायक राजनेता आ गए और लगे मूर्खों की तरह ब्यान बाजी करने...  पता नहीं कब तक ऐसी मुर्खता यह लोग करते रहेंगे और मीडिया वाले अपना बेहूदा खेल खेलते रहेंगे.... आज मेरे किसी बहुत ही प्रिय ने सवाल किया की कब तक लोग मीडिया की बेकार और बेमतलब खबरे  और सरकार की घटिया बयानबाजी झेलते रहेंगे... मैंने उन्हें एक ही जवाब दिया की लोग इनकी बातें सुनते ही कब हैं.... लोग खबरी चैनल खबरों के लिए कम और "सास बहु साज़िश" देखने के लिए ज्यादा  लगाते हैं... लेकिन यह तो पक्का है की इन खबरी चैनलों पे लगाम लगाने का समय अब आ गया है... 

रविवार, 20 मई 2012

कश्मीर धरती पे स्वर्ग?? हाँ बिलकुल हो सकता है...


अभी पिछले दिनों २० अप्रैल २०१२ को इस्लामाबाद के रिहायशी इलाके पे यात्री हवाई जहाज़ गिरने की खबर टीवी पे देखि | देख कर लगा की वहाँ के लोगो को भी उतना ही दर्द होता है जितना हम भारत वासिओं को किसी अपने के जाने का होता है | उस दुर्घटना में १२७ लोग मारे गए जिनमे बच्चे, बूड़े, जवान सभी तरह के लोग थे| मरने वाले लोगो के रिश्तेदार एक आम इंसान की तरह ही बिलख रहे थे | मरने वालों में एक नवविवाहित दम्पति भी थी जो हनीमून की यादें संजोय हुए वापिस आ रहे थे | एक आदमी अपने साले की शादी पे जा रहा था | लेकिन नहीं पहुँच पाया |

मेरा सीधा सीधा मतलब यह है की वहाँ और यहाँ की आम जनता में कोई फर्क नहीं है | वो भी अपनी सरकार से दुखी है और हम भी | वो भी आये दिन आतंक की घटनओं से परेशान हैं और हम भी | उनका देश हमारे देश से ज्यादा गरीब है इसलिए वहाँ भ्रष्टाचार करोड़ो में होता है और यहाँ अरबों में | दोनों तरफ भ्रष्टाचार से आम नागरिक बेहद दुखी हैं लेकिन असहाय भी |

वहाँ अगर अफरीदी के शतक पे मिठाई बांटी जाती है तो यहाँ सचिन के शतक पे पटाखे फोड़े जाते है | वहाँ हिंदी गाने सुनने का शौंक रखती है नौजवान पीड़ी तो यहाँ लोग आतिफ असलम याँ फ़तेह अली खान के दीवाने है | अमरीका में अगर उनकी कोई इज्ज़त नहीं तो वहाँ हमारे शाहरुख को भी बहुत जलील किया है अमरीका ने | लोग वहाँ भी विदेश में पड़ना और रहना चाहते है और हमारे लोग भी कुछ इसी तरह का सपना देखते है |

कुछ साल पहले की बात है | उस साल भारतीये क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया था | यह वो दौरा था जिसमे सहवाग ने मुल्तान में तिहरा शतक लगाया था | उस पूरी श्रंखला में पाकिस्तान नागरिकों ने भारतीय खिलाडियों और भारतीय नागरिक जो यहाँ से मैच देखने गए थे का तहे दिल स्वागत किया था | मेरे एक मित्र जो वहाँ लाहोर का आखिरी एकदिवसीय मैच देखने गए थे, ने हमें बताया की किस तरह उनका स्वागत हुआ वहाँ | लोगो ने उन्हें सर आँखों पे बिठा के रखा | अपने घरों में खाने की दावत दी | ढेर सारे उपहार दिए | आज भी कभी कभी फोन पे बात करते है वो लोग आपस में |  उनके घर भी हमारे घरों जैसे ही है | उनमे और उनके बच्चो में भी अच्छे संस्कार झलकते हैं|

अगर सब कुछ एक जैसा है तो फिर भी आपस में दुश्मनी क्यों ? एक दूसरे को निचा दिखने के लिए कमजोर दिखने के लिए अरबों रुपयों का खर्चा क्यों ? क्यों अगर पाकिस्तान आस्ट्रलिया से भी हारता है तो हमें खुशी मिलती है ?

क्योंकि लालची, मतलबी और कुर्सी के लिए कुछ भी करने वाले नेता दोनों ही देशों में है | धार्मिक कट्टरता के चलते जिनकी रोटी चलती है और धार्मिक नेता होने का अहंकार पालने वालों की भी दोनों देशों में भरमार है | बेरोज़गार और अनपड़ लोगो की भीड़ दोनों ही तरफ है | अपनी TRP बढानें के लिए किसी भी हद तक गिरने वाले खबरी चैनेल भी दोनों तरफ पैर पसारे हुए है |

सो जब तक दोनों देशों की जनता को यह समझ में नहीं आएगा की इन लोगो से कैसे छुटकारा हो, कुछ नहीं हो सकता | हाँ अगर दोनों मुल्कों की जनता जाग जाती है तो फिर तो क्या ही कहने| चलिए एक और कल्पना करते हैं| मान लीजिए की अगर दोनों देश की जनता अपनी अपनी सरकारों पे दबाव बनाये और एक १५-२० साल की योजना तैयार हो, तो जैसा की हम बचपन से सुनते आये है, कश्मीर सच में स्वर्ग बन सकता है |

योजना बेहद आसान है लेकिन रातो रात बदलाव वाली तो नहीं होगी |कम से कम १५-२० साल तो रखने पड़ेंगे | अगर दोनों देशों की सभी राजनितिक पार्टियां इन दोनों देशों को एक करने को राज़ी हो तो सबसे पहले धार्मिक कट्टर लोगो पे लगाम लगाई जानी चाहिय | किसी भी जगह "जात" "पात" याँ धर्म का उलेख नहीं होना चाहिय | धर्म परिवार याँ बरादरी तक ही सिमित हो | एक दूसरे को निचा दिखाने वाली ख़बरों पे रोक लगे | उग्रवादिओं को मिल कर याँ सुधारा जाये याँ निपटा देना चाहिए | फिर एक सबसे बड़ी मुश्किल यह होगी की इस दो से एक हुए राष्ट्र का नाम क्या हो ? पाकिस्तान याँ भारत तो नहीं हो सकता | तो क्यों न इसका नाम "कश्मीर" रखा जाये| कश्मीर को आधा आधा बांटने से अच्छा नहीं की इसे दोनों देशों को जोड़ के उसका नाम कश्मीर हो जाये |

जनता का कितना पैसा बचेगा जो जनता की भलाई के लिए लगाया जा सकेगा | पैसा बचेगा जो नए नए उधोग लगाने के काम आएगा| जिससे बेरोज़गारी नहीं रहेगी | बेरोज़गारी नहीं रहेगी तो आतंकवादी कहाँ से पैदा होंगे |  हमारा कश्मीर इतना खुशहाल होगा की हमारे लोगो को विदेश जाकर बेईज्ज़त नहीं होना पड़ेगा | शाहरुख खान को कोई भी शक की निगाह से नहीं देखेगा | और सोचिये युवराज और अफरीदी साथ साथ होंगे तो आस्ट्रलिया की कितनी धज्जियां उड़ायेंगे | खुशहाल कश्मीर घाटी ऐसी होगी की लोग स्विट्जर्लैंड भूल जायेंगे |
मैं जब चाहे लाहोर शोपिंग के लिए जा सकूंगा और मेरा व्यापार कितना फैलेगा |

लेकिन क्या यह संभव है ? नहीं शायद :( क्योंकि जो चाहते है वो बोलेंगे नहीं और जो नहीं चाहते है वो अपनी दुकानदारी क्यों बंद करना चाहेंगे ! वो तो अच्छे से जी ही रहें हैं| उन्हें जनता से क्या लेना देना | अभी मैं भी सोने लगा हूँ कोई और सपना देखूंगा तो जरुर आप सबके बीच रखूँगा | लेकिन फिर भी दिल से एक दुआ करना की यह सपना सच हो जाये | हमारे लिए न सही हमारे बच्चो के खुशहाल भविष्य के लिए ही सही |

शुभ रात्रि.....धन्यवाद




रविवार, 8 अप्रैल 2012

Imagination...एक कल्पना !!!

 Imagination...एक कल्पना !!!:
जिंदगी क्या है यार ?? इसे समझना बहुत मुश्किल है | ईश्वर ने हमारी जिंदगी को बहुत गलत प्रोग्राम किया हुआ है | अगर वो चाहता तो इसे थोडा सा बदल कर बहुत अच्छा बना सकता था| उसे अपने मनोरंजन के लिए बनाये गए इस खेल का और मज़ा आता और हम भी अपपनी जिंदगी अच्छे से जी लेते | हम बचपन में होते हैं तो जल्दी बड़ा होना चाहते हैं | लेकिन जैसे जैसे बड़े होते जाते हैं जो हमसे बड़े हैं वो बजुर्ग हो जाते हैं | एक समय आता है की हमें डर लगना शुरू हो जाता है की कोई हमसे सदा के लिए बिछड़ न जाये |
भगवान को चाहिए था की मनुष्य की उम्र भले ही सो साल रहने देता लेकिन थोडा सा इसका क्रम बदल देता | क्रम होना चाहिए था, जन्म-बचपन-जवानी-अधेड़-जवानी-बचपन-मृतु | कल्पना करिये जब हम बचपन में होंगे हमारे माँ बाप जवान होंगे | हम जवान होंगे तो वो अधेड़ उम्र में हमारे जवान होने का आनंद ले सकेंगे और जैसे ही हम अधेड़ उम्र में जायेंगे वो वापिस जवान होने लगेंगे | मतलब हम उन्हें वो सभी सुख दे सकेंगे जो उन्होंने हमें दिए | हम वापिस जवान होंगे तो वो बचपन में पहुँच जायेंगे| अब हमारे पास मौका होगा की हम उन्हें वही प्यार दे पाए जो हमें उनसे बचपन में मिला था| सबसे बड़ी बात, उम्र के वापिसी पड़ाव में पढाई की भी जरुरत नहीं| जो सत्रह साल हम स्कूल कॉलेज में बर्बाद करते है वो वापिस जवान होने पे बर्बाद नहीं करने पड़ेंगे | कितना मज़ा होगा जिंदगी में | हम पचास के होंगे और हमारे माँ बाप तीस के| हम वापिस तीस के तो हमारे बच्चे पचास के और माँ बाप दस साल के | कितनी मज़ेदार होती न जिंदगी|
लेकिन यह एक कल्पना मात्र ही है जिसके सच होने का कोई चांस नहीं | लेकिन सपने देखने से किसी के बाप का क्या जाता है.....  ;-)
Life is weird, first you wanna grow up, then you wanna be a kid again......