रविवार, 8 अप्रैल 2012

Imagination...एक कल्पना !!!

 Imagination...एक कल्पना !!!:
जिंदगी क्या है यार ?? इसे समझना बहुत मुश्किल है | ईश्वर ने हमारी जिंदगी को बहुत गलत प्रोग्राम किया हुआ है | अगर वो चाहता तो इसे थोडा सा बदल कर बहुत अच्छा बना सकता था| उसे अपने मनोरंजन के लिए बनाये गए इस खेल का और मज़ा आता और हम भी अपपनी जिंदगी अच्छे से जी लेते | हम बचपन में होते हैं तो जल्दी बड़ा होना चाहते हैं | लेकिन जैसे जैसे बड़े होते जाते हैं जो हमसे बड़े हैं वो बजुर्ग हो जाते हैं | एक समय आता है की हमें डर लगना शुरू हो जाता है की कोई हमसे सदा के लिए बिछड़ न जाये |
भगवान को चाहिए था की मनुष्य की उम्र भले ही सो साल रहने देता लेकिन थोडा सा इसका क्रम बदल देता | क्रम होना चाहिए था, जन्म-बचपन-जवानी-अधेड़-जवानी-बचपन-मृतु | कल्पना करिये जब हम बचपन में होंगे हमारे माँ बाप जवान होंगे | हम जवान होंगे तो वो अधेड़ उम्र में हमारे जवान होने का आनंद ले सकेंगे और जैसे ही हम अधेड़ उम्र में जायेंगे वो वापिस जवान होने लगेंगे | मतलब हम उन्हें वो सभी सुख दे सकेंगे जो उन्होंने हमें दिए | हम वापिस जवान होंगे तो वो बचपन में पहुँच जायेंगे| अब हमारे पास मौका होगा की हम उन्हें वही प्यार दे पाए जो हमें उनसे बचपन में मिला था| सबसे बड़ी बात, उम्र के वापिसी पड़ाव में पढाई की भी जरुरत नहीं| जो सत्रह साल हम स्कूल कॉलेज में बर्बाद करते है वो वापिस जवान होने पे बर्बाद नहीं करने पड़ेंगे | कितना मज़ा होगा जिंदगी में | हम पचास के होंगे और हमारे माँ बाप तीस के| हम वापिस तीस के तो हमारे बच्चे पचास के और माँ बाप दस साल के | कितनी मज़ेदार होती न जिंदगी|
लेकिन यह एक कल्पना मात्र ही है जिसके सच होने का कोई चांस नहीं | लेकिन सपने देखने से किसी के बाप का क्या जाता है.....  ;-)
Life is weird, first you wanna grow up, then you wanna be a kid again......

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही उत्कृष्ट और सुंदर लिखा है...और सच भी...काश कि ये कल्पना भी साकार रूप ले ले कभी..पर असम्भव कुछ भी नहीं, आज से ५० साल पहले किसी ने आज कि कल्पना भी अनहि कि होगी ..पर आज हम सब एक दूसरे युग में जी रहे उसी प्रकार हम अपने कल कि सिर्फ कल्पना ही क्र सकते है जो होगा वो नहीं पता क्र सकते...
    दोबारा से बहुत बहुत बधाई....इतनेउत्कृष्ट विचारों के लिए...
    ब्लॉगर कि दुनिया में आपका स्वागत है...

    उत्तर देंहटाएं
  2. धन्यवाद अर्चना जी....आप लोगो से ही प्रेरणा मिली है...

    उत्तर देंहटाएं
  3. wow bhai congratz on ur 1st blog..its awesom brother...bahut achhi aur pyari kalpana hai apki...mai bhi sapno me kho gai thi aur words selection bhi perfect hai...aap ko bas thoda sa time aur chahie ise nikharne k lie...good luck for nxt
    m waiting

    उत्तर देंहटाएं
  4. स्वधा जी धन्यवाद....आप सिखाते जाओगे, मैं सीखता जाऊंगा...I m very good student :-)

    उत्तर देंहटाएं
  5. Bahut achchha likha, Vaigyanikon ko ye de diya jaye to shayad koi jugaad bana de . ye manushya ki anant soch ka hi natija hai ki ham pashan yug se aaj aabhasi duniya me aa gaye hain , ab wo din door nahi jab mahabharat kaal ki tarah ham chutki bajaye aur adrishya hokar kahi aur pahuch jaye , petrol jo mahga ho gaya hai na , koi to soch raha hoga ,Jarur hoga . Ishwar unhe kaamyaab kare aur aapke krantikari vicharo ko murt roop de.

    उत्तर देंहटाएं
  6. लोग भगवान से भिन्न भिन्न type की ख्वाइशें पूरी कराने की मन्नत मांगते हैं......
    मैं भगवान से सिर्फ ये माँगूँगा..... की आपको वो इंसान की life cycle की programming का 'Source Code' दे दे....
    ताकि आप उसमे वो सारे modifications impliment कर सकें ... जो आपके कल्पना की factory के पहले Batch मे निकले हैं....
    ( Mukesh Nagpal )

    उत्तर देंहटाएं
  7. BAHAI JI AAPKI KALPAN EKDAM MAOULIK NAVEEN JO MAINE TO KABHI KAHIN NHI PADI YA SUNI ADHIKANS LONG BUDAPE SA DARTE HAI LAIKIN AAP TO EKDAM FAINTESI SOCHA HAI AAP IS PAR EK KAHANI LIKHEYE YA UPNYAS DEKHNA BEHAD SAFAL HOGA........AAPKA BLOG BHI BEHAD SUNDER AUR AAKRSHK HAI
    - SANJAY KISHOR JAIN . SHIKOHABAD [U.P.]

    उत्तर देंहटाएं
  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. सच कहा नवीन भैय्या कि सपने देखने में किसी के बाप का क्या जाता है...पर मौजुदा दौर में हमें ना सिर्फ सफलता के सपने देखना है बल्कि उन्हे यथार्थ के धरातल पर पूरी शिद्दत के साथ समेट भी लाना है....बेहतरीन अभिव्यक्ति के साथ ब्लॉगिंग जगत में आपका स्वागत है....शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं